" देवी भागवत पुराण के अनुसार श्रावण के प्रकार "


 जय अंबे।।

पवित्र देवी भागवत पुराण मैं श्रवण के ३ प्रकार बताये गए है, जो सात्विक , राजासिक और तामसिक है। पवित्र देवी भागवत पुराण के मंत्र के अनुसार विस्तार से नीचे बताया गया है।


श्रवणं त्रिविधं प्रोक्तं सात्त्विकं राजसं तथा । 

तामसं च महाभाग सुज्ञोक्तं निश्चयान्वितम् ।।

(स्कं० १, अ० ६, मं० १०) 

~हे महाभाग ! विद्वानोंने निर्धारित करके कहा है कि सात्त्विक, राजस तथा तामस भेदानुसार श्रवण तीन प्रकारका होता है । 


सात्विक श्रवण 

सात्त्विकं वेदशास्त्रादि साहित्यं चैव राजसम् ।

तामसं युद्धवार्ता च परदोषप्रकाशनम् ।।

सात्त्विकं त्रिविधं प्रोक्तं प्रज्ञावद्भिश्च पण्डितैः ।

उत्तमं मध्यमं चैव तथैवाधममित्युत ।।

(स्कं० १, अ० ६, मं० ११,१२) 

~वेद-शास्त्रादिका श्रवण सात्त्विक, साहित्यका श्रवण राजस तथा युद्धसम्बन्धी बातों एवं दूसरोंकी निन्दाका श्रवण तामस कहा गया है । प्रज्ञावान् पण्डितोंद्वारा सात्त्विक श्रवणके भी उत्तम, मध्यम तथा अधम-ये तीन प्रकार बताये गये हैं ।

उत्तमं मोक्षफलदं स्वर्गदं मध्यमं तथा ।

अधमं भोगदं प्रोक्तं निर्णीय विदितं बुधैः ।।

(स्कं० १, अ० ६, मं० १३) 

~उत्तम श्रवण मोक्षकी प्राप्ति करानेवाला, मध्यम श्रवण स्वर्ग देनेवाला तथा अधम श्रवण भोगोंकी उपलब्धि करानेवाला कहा गया है। विद्वानोंने अच्छी तरह सोच-समझकर ऐसा निर्धारण किया है ।


राजस श्रवण 

साहित्यं चैव त्रिविधं स्वीयायां चोत्तमं स्मृतम् ।

मध्यमं वारयोषायां परोढायां तथाधमम् ।।

(स्कं० १, अ० ६, मं० १४)

~साहित्य भी तीन प्रकारका होता है। जिस साहित्यमें स्वकीया नायिकाका वर्णन हो वह उत्तम, जिस साहित्यमें वेश्याओंका वर्णन हो वह मध्यम तथा जिस साहित्यमें परस्त्रीवर्णन हो, वह अधम साहित्य कहा गया है ।


तामस श्रवण 

तामसं त्रिविधं ज्ञेयं विद्वद्भिः शास्त्रदर्शिभिः ।

आततायिनियुद्धं यत्तदुत्तममुदाहृतम् ।।

मध्यमं चापि विद्वेषात्पाण्डवानां तथारिभिः ।

अधमं निर्निमित्तं तु विवादे कलहे तथा ।।

(स्कं० १, अ० ६, मं० १५,१६) 

~शास्त्रोंके परम निष्णात विद्वानोंने तामस श्रवणके तीन भेद बतलाये हैं। किसी पापाचारीके संहारसे सम्बन्धित युद्धवर्णनका श्रवण उत्तम, कौरव पाण्डवोंकी तरह द्वेषके कारण शत्रुतामें युद्धवर्णनका श्रवण मध्यम तथा अकारण विवाद एवं कलहसे हुए युद्धके वर्णनका श्रवण अधम कहा गया है ।।


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