यह श्रीमद्देवीभागवत नामक पुराण अत्यन्त पवित्र एवं उत्तम पुराण है। इसमें अठारह हजार सुन्दर श्लोक हैं । महर्षि कृष्णद्वैपायनद्वारा विरचित इस श्रीमद्देवीभागवतपुराणमें कल्याणकारी बारह स्कन्ध तथा कुल तीन सौ अठारह अध्याय बताये गये हैं । उनमें प्रथम स्कन्धमें बीस अध्याय, द्वितीयमें बारह, तृतीयमें तीस और चतुर्थमें पच्चीस अध्याय हैं। पंचम स्कन्धमें पैंतीस अध्याय, षष्ठमें एकतीस, सप्तममें चालीस, अष्टममें चौबीस, नवममें पचास और दशम स्कन्धमें तेरह, एकादश स्कन्धमें चौबीस और द्वादश स्कन्धमें चौदह अध्याय बताये गये हैं ।
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